राजनाथ सिंह ने ICG के नए जहाज़ ‘समुद्र प्रताप’ का उद्घाटन किया | GS-3
राजनाथ सिंह नए तटरक्षक जहाज़ “समुद्र प्रताप” का उद्घाटन करेंगे
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) के एक नए जहाज़ “समुद्र प्रताप” का उद्घाटन गोवा में करेंगे।
यह जहाज़ प्रदूषण नियंत्रण जहाज़ (Pollution Control Vessel – PCV) है और तटरक्षक बल में शामिल किए जा रहे ऐसे दो विशेष जहाज़ों में से पहला है।
यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा और समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता को मजबूत करता है।
समुद्र प्रताप जहाज़ क्या है?
समुद्र प्रताप एक विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण जहाज़ है।
इसे समुद्र में होने वाले तेल रिसाव और अन्य प्रदूषण की घटनाओं से निपटने के लिए बनाया गया है।
इसके मुख्य कार्य:
- समुद्र में तेल रिसाव की पहचान और सफाई
- समुद्री प्रदूषण की घटनाओं पर तेज़ प्रतिक्रिया
- समुद्र में अग्निशमन (Fire Fighting)
- समुद्री सुरक्षा और आपदा के समय सहायता
जहाज़ की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ
- 📏 लंबाई: 114.5 मीटर
- ⚖️ विस्थापन: लगभग 4,200 टन
- 🚢 गति: 22 नॉट से अधिक
- 🧭 संचालन क्षमता: 6,000 समुद्री मील
इन क्षमताओं के कारण यह जहाज़ लंबे समय तक समुद्र में रहकर दूर-दराज़ क्षेत्रों में भी काम कर सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण की उन्नत क्षमता
समुद्र प्रताप में आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जैसे:
- तेल रिसाव का पता लगाने वाली प्रणाली
- समुद्री प्रदूषकों का विश्लेषण
- गाढ़े तेल (Heavy Oil) की रिकवरी
- प्रदूषित पानी से तेल को अलग करना
- समुद्र में आग बुझाने के उन्नत उपकरण
इनसे समुद्री प्रदूषण को फैलने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है।
कहाँ-कहाँ काम कर सकेगा यह जहाज़?
समुद्र प्रताप निम्न क्षेत्रों में काम कर सकता है:
- भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) – 200 समुद्री मील तक
- आवश्यकता पड़ने पर EEZ से बाहर भी
EEZ क्यों महत्वपूर्ण है?
- यहाँ तेल, गैस और अन्य समुद्री संसाधन होते हैं
- प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग यहीं से गुजरते हैं
- प्रदूषण होने पर मछुआरों और तटीय जीवन पर सीधा असर पड़ता है
जहाज़ का महत्व
🌱 पर्यावरण संरक्षण
- तेल रिसाव से समुद्री जीवों को भारी नुकसान होता है
- यह जहाज़ नुकसान को कम करने में मदद करेगा
🛡️ समुद्री सुरक्षा
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तटरक्षक बल की निगरानी और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ेगी
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता
- भारत की ब्लू इकोनॉमी नीति को बल
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्रदूषण संधियों के पालन में सहायता
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision)
- समुद्र प्रताप = प्रदूषण नियंत्रण जहाज़ (PCV)
- उद्घाटन: राजनाथ सिंह, गोवा
- लंबाई: 114.5 मीटर
- गति: 22+ नॉट
- संचालन क्षमता: 6,000 समुद्री मील
- EEZ और उससे आगे संचालन
- UPSC GS-3 (Disaster Management / Internal Security) से संबंधित
📌 निष्कर्ष:
समुद्र प्रताप जहाज़ भारत की समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगा।
📝 UPSC GS–3 मॉडल उत्तर
प्रश्न: भारतीय तटरक्षक बल के नए प्रदूषण नियंत्रण जहाज़ ‘समुद्र प्रताप’ के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा भारतीय तटरक्षक बल के नए प्रदूषण नियंत्रण जहाज़ ‘समुद्र प्रताप’ का उद्घाटन किया जा रहा है। यह जहाज़ भारत की समुद्री सुरक्षा और समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता को मजबूत करता है।
समुद्र प्रताप एक विशेष प्रदूषण नियंत्रण जहाज़ (Pollution Control Vessel – PCV) है, जिसे समुद्र में तेल रिसाव, समुद्री प्रदूषण और आपात स्थितियों से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी लंबाई 114.5 मीटर है और यह 6,000 समुद्री मील तक लगातार संचालन करने में सक्षम है।
यह जहाज़ भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और उससे आगे भी काम कर सकता है, जो समुद्री संसाधनों, अपतटीय तेल-गैस प्रतिष्ठानों और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जहाज़ में तेल रिसाव की पहचान, तेल की रिकवरी, प्रदूषित जल से तेल को अलग करने और समुद्र में अग्निशमन जैसी उन्नत सुविधाएँ मौजूद हैं।
पर्यावरणीय दृष्टि से, तेल रिसाव समुद्री जैव विविधता और तटीय आजीविका के लिए गंभीर खतरा होता है। ऐसे में समुद्र प्रताप त्वरित प्रतिक्रिया देकर नुकसान को कम करने में सहायक होगा। साथ ही, यह भारत की ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्रदूषण संधियों के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।
निष्कर्ष:
समुद्र प्रताप न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को नई मजबूती प्रदान करता है।
✍️ 10–12 मार्क्स के लिए पॉइंट फॉर्म (Backup)
- समुद्र प्रताप = प्रदूषण नियंत्रण जहाज़ (PCV)
- भारतीय तटरक्षक बल के लिए समर्पित जहाज़
- तेल रिसाव व समुद्री प्रदूषण से निपटने में सक्षम
- EEZ और उससे आगे संचालन क्षमता
- समुद्री पर्यावरण संरक्षण में सहायक
- ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा
- UPSC GS–3: Disaster Management + Internal Security