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वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी के अंदर की पहली 3D तस्वीरें तैयार कीं | GS-3


वैज्ञानिकों ने पहली बार एक सक्रिय ज्वालामुखी के भीतर की 3D तस्वीरें तैयार कीं

समाचार का सार

वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल Popocatépetl (मेक्सिको) के अंदरूनी हिस्से की पहली उच्च-गुणवत्ता वाली 3D तस्वीरें तैयार की हैं।
यह अध्ययन ज्वालामुखी के भीतर मैग्मा की संरचना और गतिविधियों को समझने में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है।

यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस ज्वालामुखी के 100 किलोमीटर के दायरे में लगभग 2.5 करोड़ लोग रहते हैं, जिनमें बड़े शहर, अस्पताल और हवाई अड्डे शामिल हैं।


Popocatépetl ज्वालामुखी के बारे में

  • स्थान: मेक्सिको
  • सक्रियता: 1994 से लगातार सक्रिय
  • वर्तमान स्वरूप: लगभग 20,000 वर्ष पहले बना
  • गतिविधियाँ:

  • धुआँ और गैस उत्सर्जन
  • राख का फैलाव
  • समय-समय पर लावा डोम का बनना और टूटना
  • हालिया बड़ा विस्फोट: वर्ष 2023


ज्वालामुखी का आंतरिक मानचित्र बनाना क्यों कठिन था?

अब तक ज्वालामुखी के भीतर की संरचना को स्पष्ट रूप से समझ पाना मुश्किल था क्योंकि:

  • पहले किए गए अध्ययन (लगभग 15 वर्ष पहले) कम गुणवत्ता वाले थे
  • अलग-अलग शोधों के निष्कर्ष आपस में मेल नहीं खाते थे
  • यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि:

    मैग्मा कहाँ जमा होता है
  • विस्फोट से पहले वह कैसे और किस दिशा में आगे बढ़ता है

ज्वालामुखी का अंदरूनी भाग एक लगातार बदलने वाली प्रणाली है, जिसमें मैग्मा, गैस, चट्टानें और भूमिगत जल शामिल होते हैं।


3D तस्वीरें कैसे तैयार की गईं?

शोध दल

  • नेतृत्व: मार्को कालो (Marco Calò)
  • संस्थान: मेक्सिको का राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय

फील्डवर्क

  • वैज्ञानिकों ने लगभग 5 वर्षों तक ज्वालामुखी पर नियमित रूप से कार्य किया
  • खतरनाक परिस्थितियाँ:

    खराब मौसम
  • अचानक विस्फोट की आशंका
  • उपकरणों को नुकसान


उपयोग की गई तकनीक

1. सिस्मोग्राफ

  • ज़मीन के कंपन को प्रति सेकंड कई बार रिकॉर्ड करते हैं
  • मैग्मा और गैस की गतिविधियों से उत्पन्न भूकंपीय तरंगों का अध्ययन किया गया

2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

  • बड़े भूकंपीय डेटा का विश्लेषण
  • यह पहचानने में मदद करता है:

    चट्टान और मैग्मा का अंतर
  • तापमान और गहराई
  • ठोस या पिघली अवस्था

👉 इस पूरी प्रक्रिया को ज्वालामुखीय भूकंपीय टोमोग्राफी कहा जाता है, जो मानव शरीर के CT स्कैन जैसी तकनीक है।


3D इमेजिंग से क्या नए तथ्य सामने आए?

  • तस्वीरें क्रेटर के नीचे 18 किलोमीटर गहराई तक जाती हैं
  • ज्वालामुखी के भीतर:

    एक नहीं, बल्कि कई मैग्मा भंडार मौजूद हैं
  • मैग्मा अलग-अलग गहराइयों पर फैला हुआ है
  • दक्षिण-पूर्वी भाग में मैग्मा की मात्रा अधिक पाई गई

➡️ इससे यह स्पष्ट हुआ कि ज्वालामुखी केवल एक मैग्मा कक्ष पर आधारित नहीं, बल्कि
कई स्तरों वाला जटिल मैग्मा सिस्टम है।


यह अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है? (GS-3 दृष्टिकोण)

1. आपदा प्रबंधन

  • ज्वालामुखी विस्फोट की बेहतर भविष्यवाणी
  • समय पर चेतावनी और सुरक्षित निकासी योजनाएँ
  • बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा

2. वैज्ञानिक महत्व

  • ज्वालामुखी को “प्राकृतिक प्रयोगशाला” के रूप में समझने में मदद
  • समय के साथ आंतरिक बदलावों का अध्ययन संभव

3. जन-सुरक्षा

  • लोगों तक सही और भरोसेमंद जानकारी पहुँचना
  • अफवाह और डर में कमी


परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य (UPSC / BPSC)

  • Popocatépetl: मेक्सिको का सक्रिय ज्वालामुखी
  • 100 किमी दायरे में: ~2.5 करोड़ लोग
  • पहली बार उच्च-गुणवत्ता 3D आंतरिक इमेजिंग
  • गहराई: 18 किमी
  • तकनीक:

    सिस्मोग्राफ
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

📝 GS-3 मॉडल उत्तर

प्रश्न: हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा Popocatépetl ज्वालामुखी के अंदर की 3D इमेजिंग का महत्व स्पष्ट कीजिए।


उत्तर:हाल ही में वैज्ञानिकों ने मेक्सिको के सक्रिय ज्वालामुखी Popocatépetl के अंदरूनी हिस्से की पहली उच्च-गुणवत्ता वाली 3D तस्वीरें तैयार की हैं। यह अध्ययन ज्वालामुखीय गतिविधियों को समझने और आपदा जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस शोध में सिस्मोग्राफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ज्वालामुखीय भूकंपीय टोमोग्राफी तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे क्रेटर के नीचे लगभग 18 किलोमीटर गहराई तक आंतरिक संरचना का मानचित्रण संभव हुआ। अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि ज्वालामुखी के भीतर केवल एक मैग्मा कक्ष नहीं, बल्कि कई स्तरों पर फैले मैग्मा भंडार मौजूद हैं।

यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्वालामुखी के 100 किलोमीटर के दायरे में लगभग 2.5 करोड़ लोग रहते हैं। आंतरिक संरचना की बेहतर समझ से विस्फोट की सटीक भविष्यवाणी, समय पर चेतावनी और सुरक्षित निकासी योजनाएँ बनाना संभव होगा।


निष्कर्ष:
यह अध्ययन दर्शाता है कि आधुनिक तकनीकें प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं और यह आपदा प्रबंधन व जन-सुरक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है।


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