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BPSC Success Story: Pickup Driver Ki Beti Bani SDM Dimple Jyoti Rani

बिहार की पिक-अप चालक की बेटी डिंपल ज्योति रानी ने बिना कोचिंग के, खुद पढ़कर और यूट्यूब से BPSC 67वीं परीक्षा पास की और SDM बन गईं—हर लड़की के लिए प्रेरणा का जीवंत उदाहरण।

अरे भाई लोग!
जब हमारा बिहार का नाम आता है ना, तो लोग सोचते हैं – लालू-पारा, पकौड़ा-चाय और गाँव-गाँव में पटाखे जैसे ट्रक। पर आज जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो सिर्फ़ बिहार की ही नहीं, पूरे देश की हर “छोटी-सी बिटिया” की है, जो अपने पापा की पुरानी पिक-अप गाड़ी की धूल में खेलते-खेलते IAS-IPS बनने का सपना देखती है। बात है डिंपल ज्योति रानी की – पूर्वी चंपारण के रक्सौल ब्लॉक के चिकानी गाँव की लड़की, जिसके पापा रोज़ सुबह 4 बजे नेपाल बॉर्डर तक मटर-प्याज़ का ठेला ढोते हैं और माँ आंगनवाड़ी में ₹6 हज़ार की नौकरी कर के भी घर का चूल्हा जलाती हैं। इसी घर में जन्मी डिंपल ने बिना कोचिंग-बूचिंग, बिना “दिल्ली के कोचिंग वाले चाचा” के, सिर्फ़ यूट्यूब वाले भैया और खुद के हौसले से BPSC की 67वीं परीक्षा में 256वीं रैंक पकड़ ली और सीधे SDM की कुर्सी पर जा बैठी। अब बताओ, माजा आ गया कि नहीं?

1. गाँव वाली गुर्र-गुर्र पिक-अप और मेरी बिटिया

डिंपल बताती है – “जब मैं छोटी थी, तो पापा की पिक-अप की आवाज़ सुनते ही दौड़ जाती थी। उनकी गाड़ी में कभी सब्ज़ी, कभी गन्ना, कभी बक्से। मैं भी बैठ जाती, सोचती – ‘एक दिन इसी गाड़ी में मेरा नाम वाला बोर्ड लगेगा – SDM डिंपल ज्योति रानी।’ लोग हँसते, पापा कहते – ‘सपना बड़ा हो तो गाड़ी भी बड़ी चले!’”

2. पैसा नहीं था, पर किताबें दिल्ली से मँगवा देते थे

12वीं तक की पढ़ाई पटना से। IIT-JEE का फॉर्म भरा, पर ना कोचिंग, ना ट्यूशन – रिज़ल्ट “ना” आया। “मैं रोई नहीं, समझ गई – मेरा रास्ता दूसरा है,” डिंपल कहती हैं। Jaipur से B.Tech किया; कैंपस सेलेक्शन में 6 लाख सालाना का पैकेज मिला। घर वाले बोले – “अब तो बेटी ने कमा दिया!” पर कोरोना ने कंपनी का गेट बंद करवा दिया। वापस गाँव – फिर से वही पिक-अप, वही धूल।

3. लॉकडाउन में “कोचिंग” खोली – रसोई में!

कोचिंग संस्थान बंद, पैसे नहीं। दो चीज़ बची – एक पुराना स्मार्टफोन (सेल्फी कैमरा टूटा हुआ) और माँ का ₹199 वाला रिचार्ज।
  • यूट्यूब चैनल: Study IQ, Unacademy, बिहार एक्सप्रेस – वीडियो 1.5x स्पीड पर चलाती, रसोई में आलू छीलते-छीलटे नोट्स बनाती।
  • टाइम-टेबल: सुबह 6-9 समसामयिकी, 10-1 पॉलिटी, 2-4 लंच + आंगनवाड़ी में माँ की मदद; 5-9 प्रीवियस ईयर + एसे प्रैक्टिस।
  • ब्रेक स्ट्रेटेजी: 25 मिनट पढ़ाई, 5 मिनट “गोबर गैस” स्ट्रेच; 4 चक्र के बाद 30 मिनट पावर-नैप – देसी पोमोडोरो!

4. पहला अटेम्प्ट – 3 नंबर से पिट गई

66वीं BPSC में प्रीलिम्स क्लियर नहीं हुआ। “रात भर रोई नहीं, बस दीवार पर लिखा – ‘3 नंबर कम हैं, 3 करोड़ दम नहीं!’” अगले 6 महीने उसी दीवार को देख के पढ़ाई, गलती गिन-गिन के सुधारी।

5. दूसरा अटेम्प्ट – रैंक 256, ट्रेन में रो पड़ी

रिजल्ट वाला दिन – जनरल बोगी, भीड़, फोन में PDF खुला – “Rank 256”। आँसू निकले, पसीने में मिक्स। पापा को कॉल – “पापा, SDM बन गई!” पापा ने गाड़ी साइड में लगाई, रोते-रोते यात्रियों को फ्री सफर कराया – “आज मेरी बिटिया ने टिकट काट दिया!”

6. माँ-पापा की मेहनत – मेरी मोटिवेशन
“माँ 45 डिग्री में राशन बाँटती, पापा बिना ब्रेक 18 घंटे ड्राइव करते। जब मन करता सुस्ताने को, सोचती – अगर ये दोनों थक कर नहीं रुके, तो मैं क्यों?”

7. टारगेट तय किया – टूटा नहीं

  • हर रविवार – नेक्सट वीक का टारगेट दीवार पर चॉक से लिखो।
  • हर रात – “क्या सीखा, क्या भूला” का 5 लाइन डायरी।
  • हर महीने – एक मॉक टेस्ट, खुद को गाली दो, खुद को गिफ्ट दो (माँ के हाथ का जलेबी)।

8. अब SDM ऑफिस – लाल बत्ती, पर धूल अभी भी नाक में

पहली पोस्टिंग बेतिया। सुबह 9 बजे फाइलें, दोपहर में बाढ़ राहत, शाम को स्कूल फंक्शन चीफ गेस्ट। लेकिन रात को वापस क्वार्टर में मोबाइल पर यूट्यूब – “कल का टॉपिक – डिजास्टर मैनेजमेंट, स्पीड 1.5x!”

9. मेसेज – हर लड़की के लिए

“तुम्हारे पास नेट है, नाक है, दिमाग है – बस ‘बहाना’ मत बनो। पिक-अप की धूल में खेलो, पर सपने इतने बड़े देखो कि धूल भी ‘स्टारडस्ट’ लगे। अगर मैं कर सकती हूँ, तो तुम भी कर सकते हो – बिना दिल्ली जाए, बिना कोचिंग के, बस अपने गाँव की छत पर चढ़ के आसमान छू सकते हो!”

अब आप भी शेयर करो – कोई बिटिया प्रेरित हो जाए, कोई पापा गाड़ी रोक के गले लग ले।

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