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भारत हर साल प्राकृतिक आपदाओं से GDP का 0.4% खोता है | UPSC GS-3

 भारत हर वर्ष प्राकृतिक आपदाओं के कारण औसतन अपने GDP का 0.4% नुकसान उठाता है

🌍 भारत और प्राकृतिक आपदाएँ: GDP पर बढ़ता बोझ

🔹 भारत हर वर्ष प्राकृतिक आपदाओं के कारण औसतन अपने GDP का 0.4% नुकसान उठाता है
🔹 यह नुकसान अब केवल राहत तक सीमित नहीं, बल्कि विकास और राजकोषीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।

📊 OECD डेटा (1950–2024) आधारित विश्लेषण


🔸 उभरते एशिया में आपदा परिदृश्य

▪️ उभरता एशिया (भारत, चीन, ASEAN देश) हर साल लगभग 100 प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है
▪️ हर वर्ष करीब 8 करोड़ लोग प्रभावित
▪️ प्रमुख आपदाएँ:
🌊 बाढ़ | 🌪️ चक्रवात | 🌵 सूखा | 🌋 भूकंप (क्षेत्र-विशेष)

📌 भूगोल आपदा संवेदनशीलता तय करता है
▪️ भारत → बाढ़ व चक्रवात
▪️ फिलीपींस/वियतनाम → उष्णकटिबंधीय तूफान
▪️ चीन/इंडोनेशिया → भूकंपीय जोखिम


📉 बढ़ता आर्थिक नुकसान: एक विकास संकट

📈 2010 के बाद आपदाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान तेज़ी से बढ़ा है

मुख्य कारण:
▪️ जलवायु परिवर्तन
▪️ संवेदनशील क्षेत्रों में अनियोजित शहरीकरण
▪️ परिसंपत्तियों का अधिक संकेंद्रण
▪️ अपर्याप्त जोखिम वित्तपोषण

➡️ आज प्राकृतिक आपदाएँ “Development Shocks” बन चुकी हैं।


🇮🇳 भारत का 0.4% GDP नुकसान: क्या संकेत देता है?

▪️ यह 1990–2024 का औसत वार्षिक नुकसान है
▪️ हर साल हज़ारों करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति
▪️ नुकसान का स्वरूप:
🌊 जल-संबंधी (बाढ़, भूस्खलन) – सबसे बड़ा हिस्सा
🌪️ मौसमीय (चक्रवात, हीटवेव)
🌵 जलवायवीय (सूखा)
🌋 भूकंपीय (कम हिस्सा)

📌 भारत की आपदा संवेदनशीलता मुख्यतः जल-आधारित है।


⚠️ वर्ल्ड रिस्क इंडेक्स

▪️ भारत एशिया में दूसरा सबसे अधिक जोखिम वाला देश (फिलीपींस के बाद)
▪️ जोखिम तय होता है:
जोखिम = एक्सपोज़र + संवेदनशीलता – सामना करने की क्षमता

➡️ अधिक जनसंख्या + गरीबी + जलवायु दबाव = अधिक जोखिम


💰 अब राहत नहीं, जोखिम वित्त ज़रूरी

📌 बढ़ते नुकसान के कारण आवश्यक है:
▪️ आपदा बीमा
▪️ आकस्मिक आपदा कोष
▪️ डिज़ास्टर बॉन्ड
▪️ आपदा-पूर्व वित्तपोषण

🔗 UPSC/BPSC कनेक्ट:
▪️ Sendai Framework
▪️ Climate Adaptation Finance
▪️ Fiscal Resilience
▪️ Sustainable Development Goals


⚡ 2-Minute Exam Revision

✅ भारत हर साल GDP का 0.4% आपदाओं से खोता है
✅ 2010 के बाद आपदा नुकसान में तेज़ वृद्धि
✅ भारत में बाढ़ व चक्रवात सबसे बड़ा खतरा
✅ वर्ल्ड रिस्क इंडेक्स में भारत एशिया में दूसरा
✅ जलवायु परिवर्तन = विकास जोखिम गुणक
✅ भविष्य की नीति: Risk Financing > Relief


📝 UPSC GS-3 (आपदा प्रबंधन) – मॉडल उत्तर

प्रश्न (संभावित):
भारत में प्राकृतिक आपदाएँ किस प्रकार आर्थिक विकास को प्रभावित कर रही हैं? आपदा जोखिम वित्त (Disaster Risk Financing) की आवश्यकता स्पष्ट कीजिए।


उत्तर:
भारत हर वर्ष प्राकृतिक आपदाओं के कारण औसतन अपने GDP का लगभग 0.4% नुकसान झेलता है। OECD (1950–2024) के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़, चक्रवात, सूखा और हीटवेव जैसी आपदाएँ अब अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं, जिससे वे केवल मानवीय संकट न रहकर विकास के लिए गंभीर झटके (development shocks) बन गई हैं।

भारत में आपदा नुकसान का सबसे बड़ा हिस्सा जल-संबंधी आपदाओं (बाढ़, भूस्खलन) से आता है, जिसका कारण उच्च जनसंख्या घनत्व, नदियों के मैदानों में शहरीकरण तथा जलवायु परिवर्तन है। वर्ल्ड रिस्क इंडेक्स में भारत का एशिया में दूसरा स्थान यह दर्शाता है कि अधिक एक्सपोज़र और सीमित सामना करने की क्षमता देश की संवेदनशीलता बढ़ाती है।

इस परिप्रेक्ष्य में केवल राहत कोष पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। आपदा जोखिम वित्त जैसे—बीमा, आकस्मिक कोष, आपदा बांड और आपदा-पूर्व वित्तपोषण—राजकोषीय लचीलापन बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं। सेंडाई फ्रेमवर्क भी आपदा-पूर्व निवेश पर बल देता है।


निष्कर्ष:
भारत के लिए आपदा प्रबंधन का भविष्य राहत-केंद्रित नहीं, बल्कि जोखिम-आधारित वित्तीय रणनीति में निहित है।


✍️ Essay के लिए शानदार Intro (Ready to Use)

“जलवायु परिवर्तन के युग में प्राकृतिक आपदाएँ अब केवल अस्थायी व्यवधान नहीं रहीं, बल्कि वे विकास की गति को धीमा करने वाली संरचनात्मक चुनौतियाँ बन चुकी हैं। भारत, जो हर वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से अपने GDP का लगभग 0.4% खो देता है, इस नए जोखिम परिदृश्य का एक प्रमुख उदाहरण है।”


📌 BPSC/State PCS के लिए 5 One-Liners

  1. भारत हर साल प्राकृतिक आपदाओं से GDP का लगभग 0.4% नुकसान उठाता है।
  2. 2010 के बाद आपदाओं से आर्थिक क्षति में तेज़ वृद्धि हुई है।
  3. भारत में सबसे अधिक नुकसान बाढ़ और चक्रवात से होता है।
  4. वर्ल्ड रिस्क इंडेक्स में भारत एशिया में दूसरे स्थान पर है।
  5. आपदा जोखिम वित्त, राहत-आधारित नीति से अधिक प्रभावी है।

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