अक्सर हम सुनते हैं—
“कमज़ोर इरादों वाले बहाने ढूँढ़ते हैं, मज़बूत इरादे रास्ते।”
जैनेन्द्र कुमार निगम ने यह बात सिद्ध की है। भिंड (मध्य प्रदेश) के छोटे से गाँव डोंगरपुरा में जन्मे एक साधारण किसान-पिता के बेटे ने तिहाड़ जैसे कुख्यात जेल में कैद रहकर भी DSP की वर्दी पहनने का सपना न केवल देखा, बल्कि पूरा भी किया। यह कहानी सिर्फ़ एक सफलता की नहीं, बल्कि हार-जीत-हार-जीत के अनगिनत चक्रों की है। आइए, 2000 शब्दों में विस्तार से जानते हैं—कैसे एक “जेल-बर्ड” ने “खाकी-टाइगर” बनकर इतिहास रचा।
जैनेन्द्र कुमार निगम ने यह बात सिद्ध की है। भिंड (मध्य प्रदेश) के छोटे से गाँव डोंगरपुरा में जन्मे एक साधारण किसान-पिता के बेटे ने तिहाड़ जैसे कुख्यात जेल में कैद रहकर भी DSP की वर्दी पहनने का सपना न केवल देखा, बल्कि पूरा भी किया। यह कहानी सिर्फ़ एक सफलता की नहीं, बल्कि हार-जीत-हार-जीत के अनगिनत चक्रों की है। आइए, 2000 शब्दों में विस्तार से जानते हैं—कैसे एक “जेल-बर्ड” ने “खाकी-टाइगर” बनकर इतिहास रचा।
1️⃣ बचपन: जहाँ सपने भी भूखे सो जाते थे
- जन्म: 1994, डोंगरपुरा, भिंड।
- परिवार: पिता रामस्वरूप—दिहाड़ी मज़दूर, माँ गंगा देवी—मिट्टी के बर्तन बनाकर बेचतीं।
- घर की कुल जायदाद: आधा एकड़ सूखा खेत + 2 बकरी।
- स्कूल: गाँव का सरकारी प्राइमरी, जहाँ दोपहर का मिड-डे-मील ही दिन का सबसे बड़ा “इनाम” होता था।
- पढ़ाई के साथ गाय-चराना, खेत में पानी देना, सड़क किनारे ढाबे पर बर्तन धोना—यही दिनचर्या।
टर्निंग पॉइंट: 10वीं में 84 % अंक। गाँव के सबसे “पढ़ाकू” लड़के बन गए। पिता ने ठेके से ₹6,000 उधार लेकर इंदौर के एक सस्ते कोचिंग में दाखिला दिलवाया—NEET-JEE की तैयारी के लिए।
2️⃣ पहला बड़ा झटका: कोचिंग का धोखा
- इंदौर की कोचिंग ने “स्कॉलरशिप” का विज्ञापन दिया था; 3 महीने बाद मालूम चला—यह सिर्फ़ फ़ीस-वसूली का जाल है।
- ₹1.20 लाख का खर्च, जबकि पिता की कुल सालाना आय ₹40,000 से भी कम।
- कमरे का किराया न दे पाने पर 2 बार मकान-मालिक ने सामान बाहर फेंका।
- 12वीं में 68 %; JEE Mains में 49 अंक—क्लीयर नहीं हुआ।
- निराशा इतनी कि रेलवे ट्रैक पर सोने की कोशिश भी की, लेकिन माँ की याद आई—वापस लौट आए।
3️⃣ दिल्ली की ठंड और तिहाड़ की “गर्मी”
- 2015: दिल्ली आए। पुराने राजेंद्र नगर में 8 लड़कों के साथ 10×10 कमरा।
- रोज़ाना 4 घंटे स्लीप, 6 घंटे लाइब्रेरी, 14 घंटे पार्ट-टाइम जॉब—Zomato डिलीवरी, किराने का ठेला, मेट्रो में अखबार बाँटना।
- दिसम्बर 2016: एक रात खाली पेट सड़क किनारे सोए थे; पुलिस ने “संदेह” में उठाया।
- बैग में मिला एक पुराना चाकू (जो डिलीवरी के डिब्बे काटने के काम आता था) → हथियार रखने का आरोप → 6 महीने जेल की सज़ा → तिहाड़ जेल, सेल नं. 8।
4️⃣ तिहाड़ के अंदर: जहाँ “सपने” भी बंद होते हैं
- पहली रात: 42 कैदियों की भरी बैरक, बिस्तर नहीं—सिर्फ़ सीमेंट का फर्श।
- गर्मी: 47 °C, पंखा टूटा, पानी 2 बार—सुबह 6 बजे, शाम 5 बजे।
- बाकी कैदी: चेन-स्नेचर, रेप-केस, मर्डर—नए को “नसीहत” देते—“यहाँ आकर सपने मत देखा कर।”
- जैनेन्द्र ने सोचा: “अगर मैं यहीं ठहर गया, तो गाँव में माँ को मेरा नाम लेकर भी कोई नहीं पुकारेगा।”
📌 जेल-लाइब्रेरी: नया संसार
- तिहाड़ में 12,000 किताबों की लाइब्रेरी है।
- पहली किताब: “Indian Polity” by M. Laxmikanth—किसी ने पन्ने फाड़े हुए थे, उधार मिली।
- रोज़ाना 10 घंटे पढ़ाई: सुबह 4 बजे उठकर बैरक के बाथरूम की लाइट के नीचे; रात 10 बजे तक।
- 6 महीने में पूरी Polity, History, Geography, Aptitude—हैंड-नोट्स बनाए 1,800 पन्नों के।
5️⃣ रिहाई: वापसी की कहानी
- जून 2017: छूटे। पास में ₹120, जेल गेट पर मिला पुराना मोबाइल—सिर्फ़ 2G।
- दिल्ली वापसी: फिर वही 10×10 कमरा, लेकिन इस बार टारगेट साफ़—SSC CGL नहीं, State PCS (मध्य प्रदेश)।
- दिन का रूटीन:
- 5-9 am: अखबार बाँटना → ₹300 दैनिक
- 10 am-1 pm: कोचिंग क्लास (ऑडिट के पैसे बचाने के लिए बैक-बैंच में बैठना)
- 2-6 pm: कैफ़े में वेटर → ₹150 + खाना
- 7 pm-2 am: सेल्फ़ स्टडी, नोट्स रिवीज़न
6️⃣ 2018: पहला अटेम्प्ट—फेल
- MPPSC Pre: 6 अंकों से कट-ऑफ़ मिस।
- दिल टूटा, लेकिन गाँव से माँ का फोन—“बेटा, खेत में बारिश हुई है, तू भी बरस जा।”
- दिल्ली छोड़कर ग्वालियर शिफ़्ट हुए—किराया सस्ता, मंडी में रात-गार्ड की नौकरी (₹8,000/माह)।
7️⃣ 2019: दूसरा अटेम्प्ट—इंटरव्यू तक पहुँचे
- Pre क्लीयर → Mains में 312/400 अंक → इंटरव्यू तक पहुँचे।
- इंटरव्यू में पूछा गया: “आपके बारे में तिहाड़ का केस दर्ज है—आपको क्यों चुनें?”
- जवाब: “सर, मैंने ग़लती से चाकू रखा था, लेकिन उस चाकू ने मुझे अपने अंदर की असली ताक़त काट-काटकर निकाली। आज मैं कानून का रखवाला बनना चाहता हूँ, क्योंकि मैं जानता हूँ कि क़ैद में क्या होता है।”
- रिज़ल्ट: 8 नंबर से मिस—UR कैटेगरी में 412 रैंक, जबकि खाली सीट 410।
8️⃣ 2020: कोरोना, कंगाली और “वर्चुअल” टूटन
- लॉकडाउन → मंडी बंद → रोज़गार ख़त्म।
- गाँव वापसी: 1,200 km ऑटो-लिफ़्ट, ट्रक, ट्रैक्टर—6 दिन।
- घर पहुँचे तो पिता ₹70,000 के कर्ज़ में; खेत गिरवी।
- गाँव में 4 घंटे बिजली; मोबाइल डेटा 1 GB/दिन—यूट्यूब लेक्चर बफ़र होता था।
- रात में 12-4 am तक पढ़ाई—क्योंकि बाकी समय खेत में पानी लगाना पड़ता था।
9️⃣ 2021: थर्ड अटेम्प्ट—DSP बन गए!
- Pre: AIR 19
- Mains: 402/500 (Top-5 में नाम)
- इंटरव्यू: 92/100 (बोर्ड ने केस-स्टडी मॉडल पर सराहा)
- फ़ाइनल रिज़ल्ट: UR रैंक 7 → Post: Deputy Superintendent of Police (DSP), मध्य प्रदेश।
सेलिब्रेशन:
- गाँव में 2 दिन बिजली-कट नहीं हुआ—लोगों ने इनवर्टर लगवा दिए!
- माँ ने पहली बार फ़ोन में “वीडियो कॉल” देखा—बोलीं, “बेटा तू TV में आ गया!”
🔟 ट्रेनिंग डायरी: खाकी की पहली सुबह
- SVNPA हैदराबाद: 54वें बैच.
- PT दौड़: 5 km, 22 मिनट—ट्रेनर ने पूछा, “तिहाड़ में दौड़ते थे?”
- जवाब: “सर, 47 °C में पानी के लिए दौड़ना पड़ता था—यह तो AC मैदान है!”
- फ़ायरिंग: 30 राउंड में 292/300 स्कोर—बेस्ट इन बैच.
- थीसिस टॉपिक: “Prison Reforms: Need for Correctional Officers’ Upskilling”
| चरण | साल | मुख्य घटना | लर्निंग पॉइंट |
|---|---|---|---|
| बचपन | 1994-2010 | ₹500/माह आय, 84 % 10वीं | “स्कोर बड़ा है, तो दरवाज़ा बड़ा खुलेगा” |
| कोचिंग धोखा | 2015 | ₹1.2 लाख डूबे | “Research before you pay” |
| तिहाड़ | 2016-17 | 6 महीने जेल, 1,800 पेज़ नोट्स | “लाइब्रेरी कहीं भी हो, गुरु तो किताब ही है” |
| रिहाई | 2017 | ₹120 जेब में | “स्टार्ट from zero, but never stop” |
| PCS-1 | 2018 | 6 नंबर से मिस | “Fail = First Attempt In Learning” |
| PCS-2 | 2019 | इंटरव्यू 8 नंबर से मिस | “Close is not closed—try again” |
| कोरोना | 2020 | बेरोज़गार, गाँव वापसी | “Crisis = खेत+ईशा, यानी मौका” |
| PCS-3 | 2021 | DSP बने | “Consistency beats talent” |
🎯 21 लर्निंग लेसन
- बैकग्राउंड सिर्फ़ शोर है, कैरेक्टर वॉल्यूम है।
- पैसा कम हो तो समय ज़्यादा लगेगा—लेकिन रास्ता बंद नहीं।
- जेल जैसी जगह भी लाइब्रेरी हो सकती है, अगर नज़रिया सही हो।
- रिजेक्शन लेटर कभी आपका नाम नहीं होता—सिर्फ़ फीडबैक है।
- 1 GB डेटा भी UPSC क्रैक करा सकता है, अगर 1 GB घंटा पढ़ाई हो।
- माँ-पिता का भरोसा सबसे बड़ा EMI है—default मत करो।
- Part-time job में इज़्ज़त घटती नहीं, बैंक बैलेंस बढ़ता है—दोनों ज़रूरी हैं।
- इंटरव्यू में अपना “डार्क पास्ट” छुपाओ मत—convert करो।
- 8 नंबर से मिस करना बेहतर है, कभी न ट्राई करना नहीं।
- Consistency > Motivation; मोटिवेशन फैन है, consistency AC है।
- गाँव वापसी “फेल” नहीं, “रिचार्ज” है।
- जेल की सलाखें सिर्फ़ बॉडी को रोकती हैं, दिमाग़ को नहीं।
- नोट्स हाथ से लिखो—muscle memory से दिमाग़ तक जाता है।
- कोई भी exam आपका आख़िरी प्लान नहीं होना चाहिए—Plan B तैयार रखो।
- रात 2 बजे की चुप्पी में भी दुनिया सुन रही है—keep grinding.
- Success मिलने पर पुराने दोस्तों को भूल जाओगे तो success टिकेगी नहीं।
- पैसा कमाने के लिए 4 घंटे निकालो, सपने पूरे करने के लिए 8—कुल 12 घंटे बचते हैं।
- जेल के अंदर भी humanity है—किसी का बोरा पानी उठा देना कभी छोटा नहीं।
- Rank list में नाम आने पर भी घमंड मत करो—वर्दी पहनने के बाद असली इम्तिहान शुरू होता है।
- अपनी कहानी शेयर करो—कोई ज़िंदगी बदल सकती है।
- Last but not least—“Never, ever give up.”
जैनेन्द्र आज भिंड ज़िले में DSP हैं। हर सुबह 6 बजे दौड़ते हैं—उसी रास्ते से गुज़रते हैं जहाँ 7 साल पहले अखबार बाँटा करते थे। बस अब हाथ में अखबार नहीं, हेलमेट और वर्दी है। उनकी कहानी बताती है—
“तुम्हारा past तुम्हारा परिचय हो सकता है, पर तुम्हारा परिणाम नहीं।”
तो अगली बार जब life तुम्हें “तिहाड़” जैसा कोई डार्क टनल दिखाए, तो याद रखना—
टनल के अंदर लाइब्रेरी भी हो सकती है, बस टॉर्च तुम्हारे अंदर होनी चाहिए।
टनल के अंदर लाइब्रेरी भी हो सकती है, बस टॉर्च तुम्हारे अंदर होनी चाहिए।
“जय हिंद, जय भारत—और जय उस हर योद्धा की, जो अभी भी संघर्ष कर रहा है।”
