यह रहा “स्टेम सेल थेरेपी (Stem Cell Therapy)” का संक्षिप्त और BPSC Mains (GS Paper-II या विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग) के लिए उपयुक्त नोट्स 👇
🧬 स्टेम सेल थेरेपी : प्रमुख बिंदु (Key Points for BPSC Mains)
🔹 1. परिचय (Introduction)
स्टेम सेल थेरेपी एक आधुनिक पुनर्जनन चिकित्सा तकनीक (Regenerative Medicine) है, जिसमें शरीर की क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त ऊतकों (Tissues) और अंगों को पुनः विकसित करने के लिए स्टेम कोशिकाओं (Stem Cells) का उपयोग किया जाता है।
इन कोशिकाओं की विशेषता यह है कि ये स्वयं को विभाजित (Self-renewal) कर सकती हैं और शरीर की किसी भी प्रकार की कोशिका में परिवर्तित (Differentiate) होने की क्षमता रखती हैं।
यह तकनीक शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया को वैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाती है और कई असाध्य बीमारियों के लिए नई उम्मीद प्रदान करती है।
🔹 2. प्रकार (Types of Stem Cells)
(1) Embryonic Stem Cells (भ्रूणीय स्टेम सेल)
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इन्हें भ्रूण (Embryo) से प्राप्त किया जाता है।
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ये Pluripotent होती हैं, यानी शरीर की लगभग किसी भी कोशिका में परिवर्तित हो सकती हैं।
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इनका सबसे बड़ा विवाद नैतिक (Ethical) है क्योंकि इन्हें भ्रूण के प्रयोग से तैयार किया जाता है।
(2) Adult Stem Cells (वयस्क स्टेम सेल)
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यह कोशिकाएँ वयस्क शरीर के विभिन्न अंगों जैसे अस्थि मज्जा (Bone Marrow), रक्त, त्वचा और वसा से प्राप्त की जाती हैं।
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ये Multipotent होती हैं यानी सीमित प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं।
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इनसे कोई नैतिक विवाद नहीं जुड़ा होता, इसलिए इन पर अधिक अनुसंधान किया जा रहा है।
(3) Induced Pluripotent Stem Cells (iPSCs)
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वैज्ञानिकों ने वयस्क कोशिकाओं को प्रयोगशाला में भ्रूणीय जैसी क्षमता प्रदान कर इन्हें विकसित किया है।
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इनसे नैतिक विवाद नहीं होता और अनुसंधान में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
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iPSCs भविष्य की चिकित्सा का सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प बन सकती हैं।
🔹 3. उपयोग (Applications / Uses)
स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग के क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। इसके प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं —
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रक्त संबंधी रोगों जैसे ल्यूकेमिया (Leukemia), थैलेसीमिया (Thalassemia) आदि के उपचार में।
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स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (Rehabilitation in spinal injuries) — रीढ़ की हड्डी की चोट से क्षतिग्रस्त तंत्रिका कोशिकाओं को पुनः विकसित किया जा सकता है।
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मधुमेह (Diabetes), हृदय रोग (Heart Disease), पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease), अंधत्व (Blindness) और कैंसर (Cancer) के उपचार में इसकी अपार संभावनाएँ हैं।
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अंग पुनर्निर्माण (Organ Regeneration) — भविष्य में यह तकनीक अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता को कम कर सकती है।
🔹 4. भारत में पहल (Indian Initiatives)
भारत ने स्टेम सेल अनुसंधान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं —
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ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) ने स्टेम सेल अनुसंधान के लिए National Guidelines for Stem Cell Research (2023) जारी किए हैं, जो इस क्षेत्र में नैतिक और वैज्ञानिक मानकों को निर्धारित करते हैं।
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देश के प्रमुख अनुसंधान केंद्र जैसे AIIMS (Delhi), NCCS (Pune), CCMB (Hyderabad) और NII (Delhi) इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
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Stem Cell Registry of India की स्थापना दाता और रोगियों की जानकारी को एकीकृत करने के उद्देश्य से की गई है।
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कई निजी और सरकारी अस्पताल अब स्टेम सेल थेरेपी आधारित उपचारों पर प्रयोगात्मक स्तर पर काम कर रहे हैं।
🔹 5. लाभ (Advantages)
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यह तकनीक स्थायी इलाज (Permanent Cure) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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अंग प्रत्यारोपण पर निर्भरता को कम करती है।
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दुर्लभ और असाध्य रोगों के उपचार में नई उम्मीद देती है।
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स्टेम सेल शरीर के भीतर प्राकृतिक रूप से पुनर्जनन की प्रक्रिया को तेज करती है।
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इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मानव जीवन प्रत्याशा में वृद्धि संभव है।
🔹 6. चुनौतियाँ (Challenges)
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उच्च लागत (High Cost) — यह उपचार अभी बहुत महँगा है, जिससे आम नागरिकों की पहुँच सीमित है।
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तकनीकी जटिलता (Technical Complexity) — कोशिकाओं के नियंत्रण और सफल प्रत्यारोपण में कठिनाई।
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नैतिक व धार्मिक विवाद (Ethical Issues) — विशेषकर भ्रूणीय स्टेम सेल के उपयोग को लेकर।
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साइड इफेक्ट्स — कोशिकाओं के कैंसरस रूप (Tumor Formation) में परिवर्तित होने की संभावना।
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नियामक ढाँचा (Regulatory Framework) — अब भी एक सशक्त, स्पष्ट और वैश्विक स्तर पर मान्य नीति की आवश्यकता है।
🔹 7. निष्कर्ष (Conclusion)
स्टेम सेल थेरेपी आधुनिक चिकित्सा का एक क्रांतिकारी और परिवर्तनकारी क्षेत्र है। यह न केवल बीमारियों के उपचार में नई संभावनाएँ खोल रही है, बल्कि अंग पुनर्निर्माण और पुनर्जनन चिकित्सा की दिशा में भविष्य की नींव भी रख रही है।
हालाँकि, इसके उपयोग में नैतिकता, वैज्ञानिक अनुसंधान और सार्वजनिक नीति के बीच संतुलन आवश्यक है। भारत को इस दिशा में सुरक्षित, सस्ती और मानकीकृत नीति अपनानी होगी, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके।
📘 उत्तर लिखते समय (BPSC Mains Writing Tip):
“स्टेम सेल थेरेपी जैव-प्रौद्योगिकी की वह शाखा है जो भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र को नए आयाम देने की क्षमता रखती है। इसके उपयोग में नैतिकता, विज्ञान और नीति—तीनों का संतुलन आवश्यक है।”
