🧬 क्लोनिंग (Cloning) – संक्षिप्त नोट्स BPSC Mains हेतु | Cloning in Hindi
🔹 1. परिचय (Introduction)
क्लोनिंग एक जैव-प्रौद्योगिकीय प्रक्रिया (Biotechnological Process) है, जिसमें किसी सजीव जीव, कोशिका या DNA की सटीक आनुवंशिक प्रतिलिपि (Exact Genetic Copy) बनाई जाती है।
यह तकनीक आधुनिक जीन इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) और बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
‘Clone’ शब्द ग्रीक भाषा के “Klon” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है — “शाखा (Branch)” या “प्रतिलिपि (Copy)”।
क्लोनिंग का उद्देश्य किसी जीव की समान आनुवंशिक पहचान वाली कोशिकाएँ या जीव बनाना है, ताकि उनका उपयोग चिकित्सा, अनुसंधान या संरक्षण में किया जा सके।
🔹 2. क्लोनिंग के प्रकार (Types of Cloning)
(1) जीन क्लोनिंग (Gene Cloning)
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किसी विशिष्ट DNA या जीन खंड (Gene Segment) की प्रतिलिपि बनाना।
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उपयोग — औषधि निर्माण (Pharmaceuticals), जीन थेरेपी, आनुवंशिक रोगों के अध्ययन और DNA विश्लेषण में।
(2) कोशिका क्लोनिंग (Cell Cloning)
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एक ही प्रकार की कोशिकाओं की बड़ी जनसंख्या तैयार की जाती है।
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उपयोग — कैंसर अनुसंधान, औषधि परीक्षण और रोग मॉडलिंग में किया जाता है।
(3) सजीव क्लोनिंग (Organism Cloning)
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किसी संपूर्ण जीव की आनुवंशिक रूप से समान प्रति बनाना।
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उदाहरण — वर्ष 1996 में “डॉली भेड़ (Dolly the Sheep)” को ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग के माध्यम से विकसित किया।
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यह पहला स्तनपायी था जो सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) तकनीक से बना।
(4) चिकित्सीय क्लोनिंग (Therapeutic Cloning)
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इसमें स्टेम कोशिकाओं (Stem Cells) का उपयोग कर अंग या ऊतक पुनर्निर्माण के लिए क्लोन बनाए जाते हैं।
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उद्देश्य — रोग उपचार और अंग पुनर्जनन है, न कि संपूर्ण जीव निर्माण।
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इसे भविष्य की चिकित्सा तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है।
🔹 3. क्लोनिंग की प्रक्रिया (Process of Cloning – Simplified)
क्लोनिंग की प्रक्रिया वैज्ञानिक दृष्टि से जटिल है, पर सरल रूप में इसे निम्न चरणों में समझा जा सकता है —
1️⃣ किसी जीव की सोमैटिक (शरीर) कोशिका ली जाती है।
2️⃣ किसी अंडाणु (Ovum) से उसका नाभिक (Nucleus) निकाल दिया जाता है।
3️⃣ सोमैटिक कोशिका का नाभिक उस अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है।
4️⃣ यह अंडाणु अब विभाजन कर भ्रूण (Embryo) बनाता है।
5️⃣ भ्रूण को किसी सरोगेट मातृ जीव (Surrogate Mother) में प्रत्यारोपित किया जाता है।
➡️ अंततः क्लोन जीव जन्म लेता है, जो आनुवंशिक रूप से मूल जीव के समान होता है।
🔹 4. क्लोनिंग के उपयोग (Applications of Cloning)
क्लोनिंग का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिनमें प्रमुख हैं —
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दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण (Conservation of Endangered Species) — विलुप्त होने वाली प्रजातियों को संरक्षित करने में क्लोनिंग सहायक हो सकती है।
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चिकित्सा क्षेत्र (Medical Field) — अंग और ऊतक निर्माण में उपयोग; उदाहरण: हृदय, त्वचा, लिवर जैसे अंगों के पुनर्निर्माण की संभावना।
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अनुवांशिक अनुसंधान (Genetic Research) — जीन स्तर पर रोगों की पहचान और उपचार विधियों के अध्ययन में मदद।
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कृषि व पशुपालन (Agriculture & Animal Husbandry) — दुग्ध उत्पादन, ऊन की गुणवत्ता और मांस उत्पादन बढ़ाने के लिए श्रेष्ठ नस्लों की प्रतिलिपि बनाना।
🔹 5. भारत में क्लोनिंग (Cloning in India)
भारत ने क्लोनिंग प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय प्रगति की है —
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2009: राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल के वैज्ञानिकों ने भैंस की पहली क्लोन “समरूपा (Samrupa)” विकसित की।
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इसके बाद “गरिमा (Garima)” और “गरिमा II” जैसे क्लोन भैंसों का सफल निर्माण किया गया।
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2018: वैज्ञानिकों ने असमिया नस्ल की भैंस का क्लोन बछड़ा विकसित किया।
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2023: NDRI के वैज्ञानिकों ने भारत की पहली क्लोन गाय “गंगा” को तैयार किया, जो भारतीय जलवायु के अनुरूप है।
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भारत में प्रजनन क्लोनिंग (Reproductive Cloning) पर प्रतिबंध है, लेकिन चिकित्सीय क्लोनिंग (Therapeutic Cloning) अनुसंधान के लिए अनुमति प्राप्त है।
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ICAR, IVRI जैसे संस्थान पशु क्लोनिंग और बायोटेक्नोलॉजी में लगातार अनुसंधान कर रहे हैं।
🔹 6. लाभ (Advantages of Cloning)
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दुर्लभ और विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण में मदद।
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चिकित्सीय क्लोनिंग से अंग प्रत्यारोपण की कमी पूरी हो सकती है।
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जीन संबंधी बीमारियों पर गहन अनुसंधान की संभावना।
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श्रेष्ठ गुणों वाले पशुओं की प्रतिलिपि बनाकर कृषि उत्पादन में सुधार।
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फार्मास्यूटिकल उद्योग में औषधियों के परीक्षण और विकास में सहयोग।
🔹 7. चुनौतियाँ एवं नैतिक प्रश्न (Challenges & Ethical Issues)
हालाँकि क्लोनिंग ने वैज्ञानिक दृष्टि से क्रांति ला दी है, लेकिन इसके कई नैतिक और व्यावहारिक प्रश्न भी हैं —
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मानव क्लोनिंग (Human Cloning) को लेकर गहरे धार्मिक और नैतिक विवाद हैं।
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जैव विविधता (Biodiversity) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि समान आनुवंशिकता वाले जीव पर्यावरणीय परिवर्तन झेल नहीं पाते।
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क्लोन जीवों में कम जीवनकाल, जीन विकार, और स्वास्थ्य समस्याएँ देखी गई हैं।
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कानूनी प्रतिबंध — भारत सहित अधिकांश देशों में मानव क्लोनिंग अवैध है।
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अत्यधिक लागत और तकनीकी जटिलता भी इसके व्यावहारिक उपयोग को सीमित करती है।
🔹 8. निष्कर्ष (Conclusion)
क्लोनिंग विज्ञान का एक अत्यंत संवेदनशील और संभावनाओं से भरा क्षेत्र है।
यह जीवन की पुनर्रचना और आनुवंशिक अनुसंधान में नई दिशा प्रदान करता है।
परंतु इसका उपयोग केवल मानव कल्याण, पर्यावरणीय संतुलन, और नैतिकता की सीमाओं में रहकर ही किया जाना चाहिए।
✍️ BPSC Mains उत्तर के लिए उपयोगी पंक्ति:
“क्लोनिंग विज्ञान की वह प्रक्रिया है जो जीवन की पुनर्रचना की क्षमता रखती है, किंतु इसका उपयोग केवल मानव कल्याण के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।”
🌱 प्रेरणादायक उद्धरण:
“विज्ञान वह शक्ति है जो मनुष्य को प्रकृति के रहस्यों को जानने और उस पर विजय पाने में सक्षम बनाती है।”
— पंडित जवाहरलाल नेहरू