डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting) का संक्षिप्त और सटीक BPSC Mains (GS Paper-II – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)


🧬 डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting) – सरल व्याख्या

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, जिसे डीएनए प्रोफाइलिंग (DNA Profiling) भी कहा जाता है, एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है जिससे किसी व्यक्ति की आनुवंशिक पहचान (Genetic Identity) स्थापित की जाती है। हर व्यक्ति का डीएनए पैटर्न अलग होता है, इसलिए इसे उंगलियों के निशान (fingerprint) की तरह अद्वितीय माना जाता है। यही कारण है कि यह तकनीक अपराध जांच, पितृत्व परीक्षण और जैविक शोध में बहुत उपयोगी है।


🔬 डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की तकनीक (Technique of DNA Fingerprinting)

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है —

1. डीएनए का नमूना प्राप्त करना

सबसे पहले व्यक्ति के शरीर से नमूना (Sample) लिया जाता है — जैसे रक्त, बाल, लार, त्वचा की कोशिकाएं या वीर्य आदि।

2. डीएनए निष्कर्षण (DNA Extraction)

नमूने से डीएनए को विशेष रासायनिक विधियों से अलग (Extract) किया जाता है।

3. डीएनए का प्रवर्धन (DNA Amplification)

अगर नमूने में डीएनए की मात्रा कम है, तो PCR (Polymerase Chain Reaction) तकनीक से उसकी कई प्रतियां (copies) बनाई जाती हैं।

4. डीएनए विश्लेषण (DNA Analysis)

डीएनए का विश्लेषण दो प्रमुख विधियों से किया जाता है:

  • RFLP (Restriction Fragment Length Polymorphism): इस विधि में डीएनए को एंजाइमों से छोटे टुकड़ों में काटकर उनके आकार के अनुसार अलग किया जाता है।

  • STR (Short Tandem Repeat) Analysis: यह आज सबसे ज्यादा प्रयोग की जाने वाली तकनीक है, जिसमें डीएनए के छोटे दोहराए जाने वाले अनुक्रमों का अध्ययन किया जाता है।

5. प्रोफाइलिंग और तुलना

अंत में, तैयार डीएनए पैटर्न की तुलना मानक नमूनों (Reference Samples) से की जाती है ताकि व्यक्ति की पहचान की जा सके।


⚖️ डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के प्रमुख उपयोग (Applications of DNA Fingerprinting)

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है —

1. आपराधिक न्याय (Criminal Justice)

  • अपराध स्थल से मिले जैविक नमूनों की तुलना संदिग्ध के डीएनए से की जाती है।

  • यह तकनीक अपराधी की पहचान करने या निर्दोष को बचाने में सहायक होती है।

2. पितृत्व एवं मातृत्व निर्धारण (Paternity & Maternity Testing)

  • किसी बच्चे के जैविक माता-पिता की पहचान के लिए डीएनए मिलान किया जाता है।

  • विरासत या संपत्ति विवादों में भी यह तकनीक साक्ष्य के रूप में उपयोग होती है।

3. आप्रवासन (Immigration)

  • यह साबित करने के लिए कि कोई व्यक्ति वास्तव में किसी परिवार से संबंधित है, डीएनए जांच का प्रयोग होता है।

4. जैविक वर्गीकरण (Biological Classification)

  • वैज्ञानिक विभिन्न प्रजातियों के बीच आनुवंशिक संबंधों का अध्ययन करते हैं।

5. लापता व्यक्तियों की पहचान (Identification of Missing Persons)

  • किसी दुर्घटना, आपदा या युद्ध में अज्ञात शवों की पहचान डीएनए से की जा सकती है।

6. चिकित्सा क्षेत्र (Medical Uses)

  • आनुवंशिक रोगों की पहचान करने और

  • अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) में दाता और प्राप्तकर्ता की अनुकूलता जांचने में यह उपयोगी है।


✅ डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के लाभ (Advantages)

  • उच्च सटीकता: यह पहचान की सबसे सटीक वैज्ञानिक विधि है।

  • वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ: निर्णय व्यक्तिगत राय पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्य पर आधारित होता है।

  • विविध उपयोग: रक्त, बाल, लार, त्वचा आदि किसी भी नमूने से किया जा सकता है।

  • कानूनी और सामाजिक समाधान: अपराध, पारिवारिक विवाद, और आप्रवासन से जुड़ी समस्याओं का समाधान संभव होता है।


⚠️ चुनौतियाँ और नैतिक मुद्दे (Challenges and Ethical Issues)

  • लागत (Cost): यह तकनीक अभी भी महंगी है, खासकर विकासशील देशों में।

  • गोपनीयता (Privacy): व्यक्ति के डीएनए डेटा के दुरुपयोग का खतरा बना रहता है।

  • गलत व्याख्या (Misinterpretation): जांच परिणामों की गलत समझ या उपयोग से कानूनी विवाद हो सकते हैं।

  • डीएनए डेटाबेस (DNA Database): बड़े स्तर पर डीएनए डेटा संग्रहीत करने से सुरक्षा और निजता से जुड़ी चिंताएँ बढ़ जाती हैं।

  • नैतिक प्रश्न: मानव क्लोनिंग या जीन संशोधन जैसे प्रयोगों पर नैतिक बहस जारी है।


🇮🇳 भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting in India)

भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) और राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशालाएँ (FSLs) इस तकनीक का उपयोग अपराध जांच और पहचान के मामलों में करती हैं।

भारत सरकार ने डीएनए प्रौद्योगिकी (गैर-सरकारी व्यक्तियों का विनियमन) अधिनियम, 2019 पारित किया, ताकि डीएनए प्रोफाइलिंग के मानक तय किए जा सकें और लोगों की गोपनीयता (Privacy) सुनिश्चित की जा सके।


“विज्ञान का उद्देश्य सत्य का पता लगाना है।” – अल्बर्ट आइंस्टीन


🔑 निष्कर्ष:
डीएनए फिंगरप्रिंटिंग आधुनिक विज्ञान की एक ऐसी खोज है जिसने अपराध जांच, न्याय व्यवस्था और चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। यह तकनीक न केवल अपराधियों की पहचान में मदद करती है, बल्कि निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने का भी माध्यम बनती है।

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