थ्री-पैरेंट बेबी (Three-Parent Baby) विषय पर संक्षिप्त और सटीक BPSC Mains (GS Paper-II – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) के अनुसार नोट्स 👇



👶 थ्री-पैरेंट बेबी (Three-Parent Baby) – सरल व्याख्या | BPSC Mains Notes in Hindi

🔹 परिचय (Introduction)

थ्री-पैरेंट बेबी एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक का परिणाम है जिसमें एक बच्चे का जैविक डीएनए तीन व्यक्तियों — दो माताओं और एक पिता से आता है।
इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य माइटोकॉन्ड्रियल आनुवंशिक रोगों (Mitochondrial Genetic Diseases) को रोकना है, जो माँ के डीएनए के माध्यम से बच्चे में जाते हैं।
इस तकनीक को माइटोकॉन्ड्रियल रिप्लेसमेंट थेरेपी (Mitochondrial Replacement Therapy – MRT) कहा जाता है।


🔹 पृष्ठभूमि (Background)

मानव शरीर की हर कोशिका में डीएनए दो स्थानों पर पाया जाता है —

  1. नाभिक (Nucleus) में, और

  2. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में।

माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का “पावर हाउस” कहा जाता है क्योंकि यह ऊर्जा बनाता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए केवल माँ से विरासत में मिलता है

अगर माँ के माइटोकॉन्ड्रिया में कोई आनुवंशिक दोष (Genetic Mutation) है, तो यह दोष बच्चे में भी पहुँच सकता है और गंभीर रोग उत्पन्न कर सकता है, जैसे — Leigh Syndrome, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
इसी समस्या से बचने के लिए थ्री-पैरेंट बेबी तकनीक विकसित की गई।


🔹 तकनीक का सिद्धांत (Scientific Principle)

इस तकनीक में तीन लोगों की आनुवंशिक सामग्री (Genetic Material) का उपयोग किया जाता है:

  • माँ (Mother 1): जिसका अंडाणु दोषपूर्ण माइटोकॉन्ड्रिया वाला होता है।

  • दाता महिला (Mother 2): जिसका अंडाणु स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया वाला होता है।

  • पिता (Father): जो शुक्राणु प्रदान करता है।

प्रक्रिया (Process)

  1. वैज्ञानिक पहली माँ के अंडाणु से नाभिक (Nucleus) को निकालते हैं।

  2. फिर उस नाभिक को दाता महिला के अंडाणु में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे पहले ही उसका नाभिक हटा दिया गया होता है।

  3. अब इस नए अंडाणु में पिता के शुक्राणु से निषेचन (Fertilization) कराया जाता है।

➡️ इस प्रकार बनने वाले भ्रूण (Embryo) में —

  • लगभग 99% नाभिकीय डीएनए (Nuclear DNA) माता और पिता से आता है।

  • और केवल 1% माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mtDNA) दाता महिला से आता है।

इसलिए यह बच्चा तीन व्यक्तियों के डीएनए से बना होता है — इसीलिए इसे “थ्री-पैरेंट बेबी” कहा जाता है।


🔹 उद्देश्य (Purpose)

  • माइटोकॉन्ड्रियल आनुवंशिक रोगों को रोकना।

  • उन दंपतियों को स्वस्थ संतान का अवसर देना जिनके परिवार में ऐसे रोगों का इतिहास है।

  • “Disease-Free Generation” की दिशा में एक कदम बढ़ाना।


🔹 पहली सफलता (First Case)

2016 में मेक्सिको में अमेरिकी डॉक्टर जॉन झांग (Dr. John Zhang) ने इस तकनीक से पहला सफल “थ्री-पैरेंट बेबी” जन्म दिया।
यह बच्चा एक जॉर्डनियन दंपति का था, जिसमें माइटोकॉन्ड्रियल बीमारी Leigh Syndrome को सफलतापूर्वक रोका गया।
इस घटना ने पूरी दुनिया में इस तकनीक की संभावनाओं पर चर्चा शुरू की।


🔹 लाभ (Advantages)

  1. आनुवंशिक रोगों की रोकथाम: गंभीर माइटोकॉन्ड्रियल रोगों को जन्म से पहले ही रोका जा सकता है।

  2. बाँझपन का समाधान: जिन महिलाओं के माइटोकॉन्ड्रिया में दोष हैं, उन्हें मातृत्व का अवसर मिलता है।

  3. स्वस्थ पीढ़ी की ओर कदम: यह तकनीक एक “Disease-Free Generation” की ओर मानवता का कदम है।

  4. वैज्ञानिक उपलब्धि: आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी की दिशा में यह एक क्रांतिकारी प्रयोग है।


🔹 नैतिक एवं सामाजिक चिंताएँ (Ethical & Social Issues)

  1. तीन माता-पिता की पहचान: बच्चे की पारिवारिक पहचान और भावनात्मक संबंधों को लेकर नैतिक प्रश्न उठते हैं।

  2. जीन संपादन पर विवाद: कुछ वैज्ञानिक इसे “Genetic Modification” मानते हैं, जिससे “Designer Babies” बनाने की आशंका बढ़ती है।

  3. दीर्घकालिक प्रभाव: यह तकनीक नई है, इसलिए इसके लंबे समय के परिणाम पूरी तरह ज्ञात नहीं हैं।

  4. धार्मिक और सामाजिक विरोध: कुछ देशों में इसे प्राकृतिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाता है।


🔹 कानूनी स्थिति (Legal Status)

  • यूके (UK) पहला देश है जिसने 2015 में इस तकनीक को कानूनी मान्यता दी।

  • अमेरिका और भारत सहित कई देशों में यह अभी अनुमोदित (Approved) नहीं है।

  • कुछ देशों में यह केवल अनुसंधान या सीमित चिकित्सा प्रयोगों के लिए अनुमति प्राप्त है।


🔹 भारत की स्थिति (India’s Status)

भारत में यह तकनीक अभी अनुसंधान स्तर पर है।
ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) इस विषय पर दिशा-निर्देश (Guidelines) तैयार करने की प्रक्रिया में है ताकि भविष्य में इस तकनीक का उपयोग सुरक्षित और नैतिक रूप से किया जा सके।


🔹 निष्कर्ष (Conclusion)

थ्री-पैरेंट बेबी तकनीक आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी की एक महत्वपूर्ण खोज है, जो मानवता को आनुवंशिक रोगों से मुक्त भविष्य की दिशा में ले जा सकती है।
हालांकि, इसके नैतिक, सामाजिक और जैविक पहलुओं पर गहन विचार आवश्यक है ताकि विज्ञान का उपयोग मानव कल्याण के लिए ही हो।

✍️ BPSC Mains के उत्तर के लिए लिखने योग्य पंक्ति:

Dream Civil Services

तैयारी का भरोसेमंद साथी — एक कदम और आगे

अगर यह सामग्री आपके काम आई हो तो इसे साझा करें और हमारी कम्युनिटी से जुड़ें — नोट्स, दैनिक क्विज़ और अपडेट्स सीधे पाएं।

GS Handwriting Complete Notes (Paid)
NCERT Class 6th–12th Handwriting Notes
सहायता (WhatsApp): +91 76540 48926
कृपया इस लेख को उन साथी अभ्यर्थियों के साथ शेयर करें जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है। आपकी सफलता ही हमारा लक्ष्य है — पढ़ते रहिए, आगे बढ़ते रहिए!

“थ्री-पैरेंट बेबी तकनीक विज्ञान की वह उपलब्धि है जो मानवता को आनुवंशिक रोगों से मुक्त भविष्य की दिशा में ले जा सकती है, परंतु इसके प्रयोग में नैतिकता और मानव मूल्यों का ध्यान रखना अनिवार्य है।”



Post a Comment

0 Comments