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ISRO और अगली बड़ी चुनौती | Space Sector Reforms & Future Missions


ISRO और उसकी अगली बड़ी चुनौती

लेख का मुख्य विचार (सरल शब्दों में)

ISRO ने यह साबित कर दिया है कि वह मुश्किल अंतरिक्ष मिशन कर सकता है
अब उसकी अगली बड़ी चुनौती है — मज़बूत संस्थान, साफ़ क़ानून, उद्योग की भागीदारी और लगातार क्षमता के साथ बड़े मिशनों को बार-बार और समय पर पूरा करना


अब तक ISRO की बड़ी उपलब्धियाँ

पिछले कुछ वर्षों में ISRO ने कई बड़ी सफलताएँ हासिल की हैं:

PSLV के ज़रिये नियमित लॉन्च
चंद्रयान-3 (2023)
→ चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग
आदित्य-L1
→ सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला मिशन
NISAR
→ जलवायु परिवर्तन और आपदा निगरानी के लिए उपग्रह

👉 इन उपलब्धियों ने भारत को दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल कर दिया है।


सफलता अब चुनौती क्यों बन रही है?

लेख के अनुसार:

  • बड़ी सफलता के बाद उम्मीदें और बढ़ जाती हैं
  • अब यह मायने नहीं रखता कि ISRO कितना सस्ता या नया था
  • असली सवाल यह है:

क्या ISRO बड़े और जटिल मिशन बार-बार, समय पर और भरोसेमंद तरीके से कर सकता है?

अब बदलाव की ज़रूरत है:

  • एक-बार की शानदार उपलब्धियों से
  • नियमित और संस्थागत प्रदर्शन की ओर

ISRO के आने वाले बड़े मिशन

ISRO एक साथ कई बड़े और मुश्किल मिशनों की तैयारी कर रहा है:

1. गगनयान मिशन

  • भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन
  • बहुत ज़्यादा सुरक्षा और विश्वसनीय तकनीक की ज़रूरत

2. नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV)

  • भारी भार उठाने की क्षमता
  • आंशिक रूप से पुन: उपयोग योग्य रॉकेट
  • भविष्य के मिशनों के लिए ज़रूरी

3. उपग्रह कार्यक्रम

  • पृथ्वी अवलोकन
  • नेविगेशन
  • संचार सेवाएँ

👉 इन सभी को एक साथ संभालना ही सबसे बड़ी चुनौती है।


ISRO पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ

आज ISRO को बहुत सारे काम एक साथ करने पड़ रहे हैं:

  • रॉकेट डिज़ाइन करना
  • हार्डवेयर बनाना
  • मिशन चलाना
  • सिस्टम जोड़ना
  • विफलताओं की ज़िम्मेदारी लेना

इससे समस्या होती है:

  • काम में देरी
  • ISRO एक ही जगह अटक जाता है
  • एक मिशन की देरी बाकी मिशनों को भी प्रभावित करती है

👉 ISRO को हर काम खुद करने की जगह कुछ ज़िम्मेदारियाँ छोड़नी होंगी


अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार: अभी अधूरे

भारत ने 2020 के बाद कुछ सुधार किए:

  • IN-SPACe – निजी कंपनियों को अनुमति देने के लिए
  • NSIL – अंतरिक्ष गतिविधियों के व्यवसायीकरण के लिए

लेकिन कमी अब भी है:

  • स्पष्ट स्पेस लॉ (Space Law) नहीं
  • बीमा और दायित्व नियम साफ़ नहीं
  • विवाद निपटारे की प्रक्रिया अस्पष्ट

👉 क़ानून के बिना ISRO पर बोझ बना रहता है।


स्पेस लॉ क्यों ज़रूरी है?

एक मज़बूत अंतरिक्ष क़ानून:

  • जिम्मेदारियाँ साफ़ करेगा
  • निजी कंपनियों को सुरक्षा देगा
  • ISRO को निजी असफलताओं से बचाएगा
  • उद्योग को आगे आने का भरोसा देगा

👉 इससे ISRO विज्ञान और खोज पर ध्यान दे सकेगा।


उद्योग और पैसे से जुड़ी समस्याएँ

औद्योगिक समस्या

  • बड़े मिशनों के लिए चाहिए:
  • उन्नत फैक्ट्री
  • मज़बूत सप्लाई चेन
  • कुशल कर्मचारी
  • भारत में अभी यह क्षमता सीमित है

वित्तीय समस्या

  • 2024 में स्पेस स्टार्ट-अप्स में निवेश घटा
  • अंतरिक्ष परियोजनाओं में:

    पैसा ज़्यादा लगता है
  • मुनाफ़ा देर से आता है

असली अगली बड़ी चुनौती क्या है?

लेख का मुख्य निष्कर्ष:

ISRO की असली परीक्षा अब शानदार मिशन नहीं, बल्कि नियमित और भरोसेमंद प्रदर्शन है।

इसके लिए ज़रूरी है:

  • तय समय पर लॉन्च
  • उद्योग-स्तर का उत्पादन
  • साफ़ नियम और क़ानून
  • ISRO पर कम बोझ

तभी मानव मिशन और डीप-स्पेस मिशन सामान्य बनेंगे।


भारत के लिए यह क्यों ज़रूरी है?

अंतरिक्ष आज ज़रूरी है:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा
  • मौसम और जलवायु निगरानी
  • आपदा प्रबंधन
  • डिजिटल सेवाएँ

👉 भारत की विश्वसनीयता अब केवल वैज्ञानिकों पर नहीं,
मज़बूत संस्थानों और शासन व्यवस्था पर निर्भर करती है


UPSC से संबंध

  • GS-II: शासन, नियामक संस्थाएँ
  • GS-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, उद्योग
  • निबंध: संस्थाएँ बनाम व्यक्ति, तकनीक और शासन


🔹 2 मिनट क्विक रिविजन

  • ISRO अब कठिन मिशन कर सकता है
  • अगली चुनौती: उन्हें नियमित बनाना
  • गगनयान और NGLV सबसे बड़े मिशन
  • ISRO पर ज़्यादा बोझ है
  • स्पेस लॉ की सख्त ज़रूरत
  • उद्योग की भूमिका बढ़ानी होगी

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