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चाबहार बंदरगाह क्या है? भारत पर अमेरिकी छूट खत्म होने का असर | UPSC

 

चाबहार बंदरगाह: भारत के लिए रणनीतिक महत्व और अमेरिकी छूट का मुद्दा

चाबहार बंदरगाह क्या है?

चाबहार बंदरगाह दक्षिण-पूर्वी ईरान में ओमान की खाड़ी पर स्थित है।
यह ईरान का एकमात्र ऐसा बंदरगाह है जो सीधे हिंद महासागर से जुड़ा हुआ है।

भारत यहाँ शहीद बेहेश्ती टर्मिनल का विकास कर रहा है।

चाबहार बंदरगाह का महत्व

  • भारत को पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच
  • पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट (चीन-समर्थित CPEC) का रणनीतिक विकल्प
  • चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के प्रभाव को संतुलित करने का साधन
  • भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी नीति का प्रमुख आधार


अमेरिका की छूट (Waiver) क्या थी?

2018 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन
चाबहार बंदरगाह को विशेष छूट दी गई थी।

छूट देने के कारण

  • अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में मदद
  • अफगानिस्तान की पाकिस्तान पर निर्भरता कम करना
  • मानवीय आपूर्ति और व्यापार को आसान बनाना


2025 में क्या बदलाव हुआ?

2025 में अमेरिका ने घोषणा की कि:

  • चाबहार बंदरगाह पर दी गई छूट समाप्त की जा रही है
  • यह फैसला ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट (IFCA) के तहत लिया गया
  • 29 सितंबर 2025 से चाबहार से जुड़ा कोई भी निवेश अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आएगा

यह फैसला अमेरिका की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति का हिस्सा है।


भारत पर इसका प्रभाव

1. आर्थिक प्रभाव

  • भारत अब तक ₹200 करोड़ से अधिक निवेश कर चुका है
  • 2024 में 10 साल की लीज़ पर समझौता हुआ था
  • बंदरगाह का व्यापार तेजी से बढ़ रहा था

2. कनेक्टिविटी पर असर

  • अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच की योजना कमजोर
  • INSTC (International North-South Transport Corridor) प्रभावित

3. कूटनीतिक चुनौती

  • भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव
  • ईरान और रूस के साथ संतुलन साधने की मजबूरी

4. भू-राजनीतिक असर

  • ईरान के चीन के और नज़दीक जाने की संभावना
  • भारत के क्षेत्रीय रणनीतिक विकल्प सीमित


अमेरिका ने ऐसा क्यों किया?

  • ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना
  • भारत पर रणनीतिक दबाव बनाना
  • अमेरिकी घरेलू राजनीति में ईरान-विरोधी रुख़ लोकप्रिय


भारत के पास क्या विकल्प हैं?

  • अमेरिका से नई छूट के लिए कूटनीतिक प्रयास
  • यूरोप और अन्य देशों के साथ संयुक्त निवेश
  • रूस और मध्य एशिया के साथ INSTC को मजबूत करना
  • ईरान के साथ सहयोग को संतुलित तरीके से जारी रखना


त्वरित तथ्य (Quick Facts)

  • स्थान: ईरान (ओमान की खाड़ी)
  • भारतीय परियोजना: शहीद बेहेश्ती टर्मिनल
  • 2018: अमेरिका ने छूट दी
  • 2025: छूट समाप्त
  • निवेश: ₹200+ करोड़
  • महत्व: पाकिस्तान बाईपास, मध्य एशिया कनेक्टिविटी


निष्कर्ष (One-Line Summary)

2025 में अमेरिका द्वारा चाबहार बंदरगाह की छूट समाप्त करने से भारत का निवेश, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और भू-राजनीतिक संतुलन तीनों प्रभावित हुए हैं।



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